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सूर्य नमस्कार क्या होता हैं? सूर्य नमस्कार का प्राचीन और आधुनिक इतिहास क्या है?

by Foggfitness

सूर्य नमस्कार क्या होता हैं? सूर्य नमस्कार का प्राचीन और आधुनिक इतिहास क्या है? Surya namaskar in Hindi

सूर्य नमस्कार क्या होता हैं? Surya namaskar in Hindi: आज इस आर्टिकल में सूर्य नमस्कार के बारे में बात करेंगे कि सूर्य नमस्कार क्या होता हैं? सूर्य का महत्व समझाने के लिए हमारे धर्म ग्रंथो में अनादि काल से चर्चा होती आयी हैं। आज के समय में भी सूर्य एक रहस्य हैं जिसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी हैं और लगातार खोज़ जारी हैं। लेकिन एक बात तो तय हैं कि यह अनादि काल से हमे अपनी ओर आकर्षित करता आया हैं।

सूर्य नमस्कार का महत्व: Surya namaskar in Hindi

हम आज के समय की बात करें या पिछले युगों की बात करें, सूर्य हमे हमेशा से जीवनदायिनी ऊर्जा देता आया हैं। आज भी हम सब और वैज्ञानिक सूर्य के बारे अधिक जानकारी खोजने के लिए तत्पर हैं। सूर्य के बारे में जानने के लिए आज का वैज्ञानिक दिन -रात एक कर रहे हैं। जबकि हमारे पूर्वज ऋषि -मुनि सूर्य की दिव्यता और उसका उपयोग करना भी जानते थे। सूर्य केवल हमारे शरीर को नहीं बल्कि हमारे सूक्ष्म शरीर को भी जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करता हैं। आज के युग (कलयुग ) में सूर्य को आग का गोला कहा जाए या कोई ग्रह कहा जाये लेकिन प्राचीन काल में हमारे ऋषि -मुनियो ( मनीषियों ) द्वारा इसके अनेक रहस्यो को जान लिया गया था। इस प्रकार उसके उपयोग करने की कला को जन-कल्याण तक पहुंचाया था। जिनको आज भी उपयोग में लाया जा रहा हैं।

अब सूर्य का ज्ञान लुप्त होता जा रहा हैं। आगे बात करने से पहले यहाँ पर हम थोड़ी सी चर्चा सूर्य के रहस्यों पर करना चाहते हैं ताकि हम जब भी सूर्य नमस्कार करे तो हमारे मन में सूर्य के प्रति लगन ,आस्था और श्रद्धा उत्पन हो और हम सब उससे लाभान्वित हो सकें।

सूर्य नमस्कार की एक आवृत्ति में 12 स्थितियां होती हैं। हर एक आसान का अपना एक मंत्र होता हैं। जिसमे प्रत्येक क्रिया का अपना लाभ हैं। प्रतिदिन नियमानुसार किया जाने वाला सूर्य नमस्कार दूसरे व्यायामों की अपेक्षा ज्यादा लाभकारी सिद्ध होता हैं। सूर्य देव का जितना वर्णन करें उतना ही कम हैं। अतः अब हम सूर्य देव को नमस्कार करने की पद्धति के बारे में जानेंगे।

सूर्य नमस्कार का प्राचीन इतिहास

सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना हैं। अतः सूर्य नमस्कार करने का मुख्य कारण यह हैं कि सूर्य द्वारा हमे जीवनदायिनी ऊर्जा मिलती हैं। सूर्य के प्रति कर्तज्ञ प्रकट करना हैं। सूर्य में स्थापित अकृत्रिम प्रतिमा को या ये कह सकते हैं कि सूर्य को अर्ध्य समर्पित करने का प्रचलन आदिकाल से होता आ रहा हैं।

जब इस भरत भूमि के पहले चक्रवर्ती राजा भरत सूर्य में स्थित जिनालयों को नमस्कार किया करते थे। लेकिन किसी कारणवश इसका प्रचार -प्रसार अधिक नहीं हो पाया। फिर भी दक्षिण भारत के आचार्यों ने इसे आत्मसात किया और इस नियम को जीवंत रखा। जब भी वे भारत के तीर्थों पर भ्रमण करने आते थे तो वहाँ भी नित्यकर्म सूर्य नमस्कार करते थे। इस प्रकार तीर्थ स्थानों की जनता उन्हें देखकर सूर्य नमस्कार की विधि का अनुसरण करती थी। तो इस तरह से फिर से सम्पूर्ण भारत में सूर्य नमस्कार का प्रचार -प्रसार हुआ।

सूर्य नमस्कार का आधुनिक इतिहास

सूर्य नमस्कार की बहुत सारी मुद्राएँ हैं परन्तु सूरत (गुजरात ) पारडी जिला के वेदमूर्ति श्रीपाद दामोदर सातवलेकर ने सर्व सुलभ बारह अंको के सूर्य नमस्कार की विधि प्रचलित की, जिसका प्रयोग पुरे भारत में किया जाता हैं। गुरु समर्थ रामदास ने शिवाजी महाराज को सूर्य नमस्कार की विधि सिखाई जिसका उन्होंने ने ध्यानपूर्वक अभ्यास किया। इसलिए उनका शरीर और चरित्र इतिहास में अद्वितीय हैं। शिवाजी महाराज ने सूर्य नमस्कार की विधि अपने सभी सैनिकों को सिखाई और इस प्रकार सूर्य नमस्कार का प्रचार -प्रसार बढ़ा। सूर्य नमस्कार के आदर्श बीज मंत्र और क्रिया मंत्र होने के कारण बारह अंको के सूर्य नमस्कार की वैज्ञानिकता बढ़ जाती हैं।

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