Home योग सूर्य नमस्कार करने से क्या लाभ होते हैं? सूर्य नमस्कार के अनोखे फ़ायदे

सूर्य नमस्कार करने से क्या लाभ होते हैं? सूर्य नमस्कार के अनोखे फ़ायदे

by Foggfitness

सूर्य नमस्कार करने से क्या लाभ होते हैं? Benefits of surya namaskar in hindi

Benefits of surya namaskar in hindi: हमारे देश में सूर्य नमस्कार की कई विधियाँ प्रचलित हैं। १२ आसनों को मिलाकर सूर्य नमस्कार की रचना हुई हैं। सूर्य नमस्कार करने से हमें अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति नियमित सूर्य नमस्कार करते हैं उनका कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम बहुत ही मजबूत और अच्छा रहता हैं। शरीर में खून का संचार और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता हैं। सूर्य नमस्कार १२ योगासन को मिलाकर बनाया गया हैं। जो व्यक्ति सूर्य नमस्कार करता हैं उसको कुछ भी दिनों में फायदे मिलना शुरू हो जाते हैं। तो चलिए सूर्य नमस्कार करने से मिलने वाले लाभों के बारे में बात करते हैं।

सूर्य नमस्कार के अनोखे फ़ायदे

  • जो व्यक्ति नियमत रूप से सूर्य नमस्कार करते हैं उन्हें प्राण शक्ति प्रदान होती हैं।
  • जल्दी सुबह सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर व्यक्ति की ऊर्जा संतुलित होती हैं।
  • रोजाना सूर्य नमस्कार के अभ्यास से व्यक्ति के पुरे शरीर का व्यायाम हो जाता हैं।
  • सूर्य नमस्कार करने से मानसिक शांति प्राप्त होती हैं। स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। बल , वीर्य व तेज की वृद्धि होती हैं।
  • रीढ़ की हड्डी के बारी -बारी से आगे तथा पीछे मुड़ने के कारण शारीरिक लाभ के साथ -साथ कुण्डलिनी जागरण में भी बहुत अधिक महत्व हैं। क्योंकि सुषुन्मा का मार्ग मेरुदण्ड ही हैं। अतः ऊर्जा ऊधर्वमुखी भी होती हैं।
  • सूर्य नमस्कार करने से कब्ज़ की समस्या दूर होती हैं। शरीर मजबूत और जवान बना रहता हैं।
  • महिलाएं सूर्य नमस्कार करके अपने शरीर को सुन्दर, आकर्षक व सुडौल बना सकती हैं।
  • १२ योगासन से बना यह आसान समस्त बिमारियों को नाश करता हैं।
  • यह आसन व्यक्ति को तेजवान बनाता हैं।
  • महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमता को दूर करता हैं।
  • विद्यार्थी को रोजाना सूर्य नमस्कार करना चाहिए ताकि बुद्धि का विकास हो सके।
  • सूर्य नमस्कार की प्रथम प्रार्थना मुद्रा करने से रक्त संचार सामान्य होता हैं। एकाग्रता और शांति प्रदान होती हैं।
  • हस्तउत्तानासन करने से उदर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता हैं। भुजाओं और कंधो की मांसपेशियों को व्यायाम होता हैं।
  • सूर्य नमस्कार का तीसरा चरण पाद हस्तासन हैं। यह उदर की चर्बी को कम करता हैं। पेट व अमाशय के रोगों को रोकता तथा नष्ट करता हैं। पेट की कब्ज़ को खत्म करता हैं। मेरुदण्ड को लचीला बनाता हैं और रक्त संचार को तेज करता हैं।
  • सूर्य नमस्कार के अश्व संचालनासन से पाचन तंत्र सुचारु रूप से कार्य करता हैं। मेरुदण्ड में लोच पैदा होती हैं और पाचन तंत्र में रक्त संचार बढ़ाता हैं।
  • पर्वतासन करने से सिर सामने की तरफ़ झुका होने के कारण रक्त संचार बढ़ जाता हैं। इससे चेहरे पर ताज़गी होने के साथ ही आँखों की रोशनी व बालों का झड़ना रुकता हैं। भुजाओं और पैरों का व्यायाम होता हैं। मेरुदण्ड को लाभ होता हैं और मेरुदण्ड सशक्त होता हैं। शरीर का लचीलापन बढ़ता हैं।
  • सूर्य नमस्कार का अष्टांग योग करने से छाती और फेफड़ो को शक्ति मिलती हैं। हाथों और पैरों की मांसपेशियोँ को मज़बूत बनता हैं।

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